गोकशी चरम पर, बाबा के करीबी होने का दावा करने वाले विधायक बने संरक्षक

लखनऊ: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के गोकशी के बयान के बाद उत्तर-प्रदेश में यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ चुका है। उन्होंने बाकायदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गाय को राज्य माता का दर्जा देने की मांग के साथ ही चेतावनी दी है कि अगर प्रदेश में गोवंश के मांस के निर्यात पर पूरी तरह रोक नहीं लगी तो वह हजारों संतों के साथ लखनऊ में डेरा डाल देंगे। वैसे मुख्यमंत्री खुद गोकशी को लेकर बहुत संवेदनशील हैं। उन्होंने गोतस्करों पर कठोरतम कार्रवाई के सख्त आदेश दे रखे हैं लेकिन उन्हीं की पार्टी के कुछ विधायक इसमें पलीता लगा रहे हैं। इन विधायकों को जहां अपने-अपने क्षेत्र में गोवंश के कटान पर सख्ती से रोक लगवाने के लिए दिन-रात काम करना चाहिए। ऐसे अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए पुलिस-प्रशासन पर दबाव बनाना चाहिए। लेकिन इसकी जगह हो ठीक उलटा रहा है। खासकर मुरादाबाद और उसके आसपास के क्षेत्रों में। सभी को मालूम है यह वही क्षेत्र है जहां सबसे ज्यादा गोवंश का कटान होता है।

मुरादाबाद, रामपुर, संभल सहित मेरठ के आसपास के कई क्षेत्रों में इस समय गौ-तस्कर बेखौफ होकर इस काम में जुटे हुए हैं। इसमें से भी सबसे ज्यादा चर्चा कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र में चल रहे गौ-तस्करी नेटवर्क की हो रही है। मुस्लिम बाहुल्य इस विधानसभा से उप चुनाव में ठाकुर रामवीर सिंह रिकार्ड वोटों से जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। यहां प्रतिदिन हजारों गोवंश का वध हो रहा है और सिस्टम मौन बना हुआ है।

   इसकी चर्चा हर स्तर पर हो रही है। विधायक ठाकुर रामवीर सिंह वैसे भी लगातार चर्चा में बने हुए हैं। पहले ठाकुर विधायकों को एकजुट करने के लिए लखनऊ में कुटुंब बैठक का आयोजन। ठाकुर विधायकों की बैठक के बाद मुख्यमंत्री बाबा योगी आदित्यनाथ घिरते नजर आए थे। जनता में ऐसा संदेश गया था मुख्यमंत्री को मजबूत करने के लिए ठाकुर विधायकों की एकजुटता दिखाई जा रही है। हुआ ठीक इसके उलटा। इससे बाबा को फायदा होने के बजाय नुकसान ही हुआ।  लेकिन इन सब घटनाक्रमों को ठाकुर विधायक रामवीर सिंह ने बखूबी भुनाया। वह स्थानीय स्तर पर यह संदेश देने में कामयाब रहे कि उन पर मुख्यमंत्री का हाथ है। इसीलिए उनका कोई कुछ बिगाड़ने की स्थिति में नहीं है। वह स्थानीय जिला प्रशासन पर रौब गांठने में कामयाब हैं। सूत्रों ने बताया की वह जो चाहे कर रहे हैं। अगर प्रशासनिक अफसर टोकता है तो उसे मुख्यमंत्री का भय दिखाया जाता है।

जहां एक तरफ उत्तर-प्रदेश में तमाम विधायक, सांसद और यहां तक मंत्री तक अपने-अपने क्षेत्रों में पुलिस-प्रशासन से बहुत ज्यादा कुछ नहीं करवा पा रहे हैं। यहां तक कुछ विधायक-सांसद तो छोटी-छोटी एफआईआर लिखवाने के लिए धरने तक पर बैठ चुके हैं, वहीं विधायक ठाकुर रामवीर सिंह का जलवा ही अलग है। पूरा प्रशासन उनके सामने नतमस्तक है। इसका असर यह है कि उनके क्षेत्र कुंदरकी में इस समय रिकार्ड गोकशी चल रही है। एक प्रत्यक्षदर्शी भाजपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इतनी अति तो मुस्लिमों की समर्थक अखिलेश और मायावती सरकार में भी नहीं थी। प्रतिदिन रात में यहां से बड़े पैमाने पर गोमांस प्रदेश और देश के तमाम हिस्सों में भेजा जा रहा है। सब कुछ खुलेआम हो रहा है। किसी की हिम्मत नहीं पड़ रही है वह शासन-प्रशासन पर सवाल उठा सके। क्योंकि विधायक खुद को मुख्यमंत्री का करीब बताते हैं।

विधायक के जलवे का ही परिणाम है आसपास के इलाकों में भी गोकशी बढ़ती जा रही है। तब जब, मुख्यमंत्री इसे पूरी सख्ती से बंद करवाने के प्रयास में जुटे हैं। अवैध काम धंधों पर सख्ती, गोतस्करी पर तो सीधे दंडात्मक कार्रवाई की पुलिस को खुली छूट देने के कारण ही मुख्यमंत्री की लोकप्रियता इतनी बढ़ी है। हिंदू समाज में गाय का क्या दर्जा है सभी को मालूम है, लेकिन यदि जनप्रतिनिधि यह नहीं समझ रहे हैं तो भाजपा का नुकसान बाद में होगा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सबसे पहले। यही उनकी यूसपी रही है। शंकराचार्य यू ही नहीं ललकार रहे हैं। शायद उनके पास तक भी यह तथ्य हैं। मुरादाबाद, मेरठ के बीच के जिलों में पिछले कुछ महीनों से गोवंश का कटान तेज हो गया है। रात में गाड़ियां खुलेआम यहां से वहां आ-जा रही हैं। ऐसे में यदि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गोकशी को मुद्दा बनाकर सैकड़ों संतों के साथ लखनऊ में डेरा डाल देते हैं तो क्या होगा?? क्या मुख्यमंत्री के पास कोई जवाब होगा। यह सही है कि मुख्यमंत्री पर अब तक कोई दाग नहीं है। वह गौमाता का सच्चे सेवक हैं। उन्होंने तो बेसहारा गोवंश के लिए प्रदेश भर में गौशाला बनवाई हैं। वहां के लिए हर साल मोटा बजट दिया जा रहा है, लेकिन क्या कारण है कि मुरादाबाद और उनके आसपास के जिलों में इन गौशालाओं में गोवंश नहीं है? एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी भाजपा नेता ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि पहले तो पैसा ऊपर तक जाता था, इसलिए सब कुछ खुलेआम चलता था लेकिन क्या अभी भी ऐसा ही है?? क्या जनप्रतिनिधि ऊपर तक सेंटिंग किए हैं?? क्या ऊपर तक सबको पैसा जा रहा है?? इसीलिए सभी ने आंखें बंद कर रखी हैं। बाबा के राज में भी अगर गोवंश बेबस कटता रहा तो फिर तो भगवान ही मालिक है।

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